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    संकट में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना (Belt and Road Initiative Project- BRI)

    वर्तमान में विश्व की लगभग सभी अर्थव्यवस्थाएँ ‘बंद अर्थव्यवस्था’ की अवधारणा से आगे बढ़कर लॉकडाउन की स्थिति में जा चुकी हैं। लॉकडाउन एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी महामारी या आपदा की स्थिति में कोई राष्ट्र अन्य राष्ट्रों के साथ ही अपने राष्ट्र की सीमाओं के भीतर भी आर्थिक संव्यवहारों पर प्रतिबंध लगा देता है ताकि उस आपदा या महामारी के प्रसार को स्थान विशेष तक सीमित किया जा सके। वैश्विक महामारी COVID-19 के प्रसार ने अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं पर भी ग्रहण लगा दिया है। इन अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना (Belt and Road initiative- BRI) का प्रमुख स्थान है। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव चीन की एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है जिसमें विश्व के कई राष्ट्रों की सहभागिता है।

    रक्षा विशेषज्ञों एवं अनुसंधानकर्त्ताओं का मानना है कि कोरोना वायरस का प्रसार चीन के अतिरिक्त उन देशों में अधिक हुआ है जो चीन की महत्त्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (Belt and Road Initiative Project) के भागीदार रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना के माध्यम से ही कोरोना वायरस के प्रसार में वृद्धि हुई।

    इस आलेख में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना (Belt and Road Initiative Project) के बारे में जानने के साथ ही कोरोना वायरस के प्रसार में इसकी भूमिका, इस परियोजना तथा इससे जुड़े विभिन्न राष्ट्रों के भविष्य पर भी विमर्श किया जाएगा।

    क्या है BRI (Belt and Road Initiative Project) परियोजना?

    • इस परियोजना की परिकल्पना वर्ष 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की थी। हालाँकि, चीन इस बात से इनकार करता है, लेकिन इसका प्रमुख उद्देश्य वैश्विक स्तर पर अपना भू-राजनीतिक प्रभुत्व कायम करना है।
    • वर्ष 2016 से वन बेल्ट वन रोड परियोजना को बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के नाम से जाना जाता है। BRI एशिया, यूरोप तथा अफ्रीका के बीच भूमि और समुद्र क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिये चीन द्वारा संचालित परियोजनाओं का एक समूह है।
    • BRI को ‘सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट’ और 21वीं सदी की सामुद्रिक सिल्क रोड के रूप में भी जाना जाता है।

    Belt and Road Initiative Project

    • BRI पहल चीन द्वारा प्रस्तावित एक महत्त्वाकांक्षी आधारभूत ढाँचा विकास एवं संपर्क परियोजना है जिसका लक्ष्य चीन को सड़क, रेल एवं जलमार्गों के माध्यम से यूरोप, अफ्रीका और एशिया से जोड़ना है।
    • यह कनेक्टिविटी पर केंद्रित चीन की एक रणनीति है, जिसके माध्यम से सड़कों, रेल, बंदरगाह, पाइपलाइनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को ज़मीन एवं समुद्र से होते हुए एशिया, यूरोप और अफ्रीका से जोड़ने की कल्पना की गई है।
    • विश्व की 70% जनसंख्या तथा 75% ज्ञात ऊर्जा भंडारों को समेटने वाली यह परियोजना चीन के उत्पादन केंद्रों को वैश्विक बाज़ारों एवं प्राकृतिक संसाधन केंद्रों से जोड़ेगी।
    • BRI के तहत पहला रूट जिसे चीन से शुरू होकर रूस और ईरान होते हुए इराक तक ले जाने की योजना है जबकि इस योजना के तहत दूसरा रूट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से श्रीलंका और इंडोनेशिया होकर इराक तक ले जाया जाना है।
    • इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य चीन को सड़क मार्ग के ज़रिये पड़ोसी देशों के अलावा यूरोप से जोड़ना है, ताकि वैश्विक कारोबार को बढ़ाया जा सके।
    • चीन से लेकर तुर्की तक सड़क संपर्क कायम करने के साथ ही कई देशों के बंदरगाहों को आपस में जोड़ने का लक्ष्य भी इस योजना में रखा गया है।
    • BRI वास्तव में चीन द्वारा परियोजना निर्यात करने का माध्यम है जिसके ज़रिये वह अपने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार का प्रयोग बंदरगाहों के विकास, औद्योगिक केंद्रों एवं विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिये कर वैश्विक शक्ति के रूप में उभरना चाहता है।


    BRI कोरोना वायरस के प्रसार का उत्प्रेरक

    • विदित है कि करोना वायरस के उद्गम का स्रोत चीन का वुहान शहर है जो दुनियाभर में अपनी ‘सी फूड मार्केट (Sea Food Market)’ के लिये प्रसिद्द है। विश्व में कोरोना वायरस के संक्रमण का पहला सूचीबद्ध मामला इसी सी फूड मार्केट में सामने आया। सी फूड मार्केट में विश्व के सभी दुर्लभ पशु-पक्षियों का माँस बिकता है तथा इसे विभिन्न देशों में निर्यात किया जाता है।
    • BRI परियोजना से जुड़े हुए देशों में कनेक्टिविटी व लॉजिस्टिक्स की बेहतर सुविधा के कारण इन देशों में दुर्लभ पशुओं व उनका माँस सरलता से निर्यात किया जाना संभव हुआ जिसके कारण इस बीमारी का प्रसार अन्य देशों तक भी हुआ।
    • BRI परियोजना के भागीदार देशों में एक प्रमुख देश इटली भी है। इटली व चीन की विभिन्न कंपनियों के कर्मचारियों का इस परियोजना के क्रियान्वयन के संदर्भ में एक-दूसरे देश में आवागमन था, जिस कारण कोरोना वायरस का स्थानांतरण मानव से मानव में हो गया।
    • इटली एक ऐतिहासिक व पर्यटन गंतव्य है। BRI परियोजना में इटली के शामिल होने के बाद चीन के साथ यातायात की बेहतर कनेक्टिविटी पर तेज़ी से कार्य हुआ, परिणामस्वरूप चीन से प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक इटली के पर्यटन स्थलों पर जाने लगे। कोरोना वायरस के प्रसार के बाद भी लाखों लोग इटली गए जिससे इस वायरस का प्रसार मानव से मानव में तेज़ी से हुआ।
    • इटली के पर्यटन स्थलों पर चीन के अतिरिक्त अन्य देशों के लोग भी बड़ी संख्या में पहुँचते हैं जिससे इस वायरस का प्रसार अन्य देशों के पर्यटकों को भी हो गया।
    • इटली के अतिरिक्त यूरोप महाद्वीप के पोलैंड, आस्ट्रिया, ग्रीस, पुर्तगाल, लक्सम्बर्ग और स्विटज़रलैंड जैसे देश भी BRI परियोजना का हिस्सा हैं। चीन के साथ इन देशों की भी बेहतर कनेक्टिविटी कोरोना वायरस के प्रसार का कारण बनी।
    • ईरान पिछले काफी समय से अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों को झेलते हुए भारी संकट में है, इस कारण उसने चीनी निवेश को बढ़ावा दिया और वर्ष 2019 में आधिकारिक तौर पर BRI परियोजना पर हस्ताक्षर किये तथा 2000 मील लंबे रेल ट्रैक जो पश्चिमी चीन से तेहरान होते हुए यूरोप में तुर्की तक जाएगी, के काम को आगे बढ़ाया। ईरान के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि या तो चीन के कर्मचारियों या फिर चीन से होकर आने वाले ईरानी व्यापारियों से यह संक्रमण ईरान में फैल गया।
    • BRI परियोजना से संबंधित CPEC प्रोजेक्ट का विस्तार चीन के काशगर प्रांत से पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक है। संभवतः पाकिस्तान में भी कोरोना वायरस के प्रसार का केंद्र बिंदु BRI परियोजना से संबंधित CPEC प्रोजेक्ट ही है।
    • यूरोप के अतिरिक्त एशिया व अफ्रीका महाद्वीप के कई देश चीन की BRI परियोजना का हिस्सा हैं। इन देशों में भी BRI परियोजना ने कोरोना वायरस के प्रसार में उत्प्रेरक का कार्य किया।
    • भारत BRI परियोजना का हिस्सा नहीं है परंतु भारत के प्रथम तीन कोरोना संक्रमित रोगी चीन के वुहान शहर से आये हुए व्यक्ति थे।


    वैश्विक प्रभाव

    • कोरोना वायरस का प्रकोप चीन की निर्माण और निवेश परियोजनाओं में देरी और व्यवधान को उत्पन्न कर रहा है। इस परियोजना के रुक जाने से कई वर्षों के परिश्रम और अरबों डॉलर का जोखिम है।
    • इस वायरस के प्रसार को रोकने में क्वारंटाइन व आइसोलेशन जैसे उपाय चीनी श्रमिकों को विदेशी निर्माण स्थलों पर जाने से रोक रहे हैं, जिससे विदेशी परियोजनाओं में श्रम की आपूर्ति करने वाली घरेलू फर्मों को श्रम शक्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
    • वायरस के वैश्विक रूप से प्रसारित होने के बाद से प्रभावित होने वाली परियोजनाओं में इंडोनेशिया में 5.5 बिलियन डॉलर की हाई-स्पीड रेल लाइन परियोजना, मलेशिया में एक रेलवे इनिशिएटिव, श्रीलंका में बंदरगाहों के निर्माण संबंधी परियोजनाएँ और पाकिस्तान में आर्थिक विस्तार संबंधी परियोजनाएँ भी शामिल हैं। अतः इन देशों को व्यापक आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ सकती है।
    • पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगित बाल्टिस्तान प्रांत के एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने CPEC परियोजना के कारण चीन की कंपनियों और सेना के तमाम कर्मचारियों की इस क्षेत्र में तैनाती के कारण कोरोना वायरस के संभावित प्रसार को देखते हुए CPEC परियोजना पर तत्काल रोक की मांग की है।
    • कोरोना वायरस के प्रसार तथा विभिन्न देशों द्वारा BRI परियोजना पर प्रतिबंध की मांग से चीन आर्थिक रूप से तनाव में है, ऐसे में चीन अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार युद्ध में समझौता कर सकता है।
    • चीन स्वयं द्वारा ऋण जाल में फँसाए गये देशों से ऋण वसूली की मांग कर सकता है, ऋण का भुगतान न करने की स्थिति में चीन उन देशों पर अपनी साम्राज्यवादी नीति का प्रयोग कर सकता है या BRI परियोजना के क्रियान्वयन के लिये उन पर दबाव बना सकता है।
    • चीन दुनियाभर में विनिर्माण की गतिविधियों का केंद्र है। यदि चीन की BRI परियोजना को प्रतिबंधित किया जाता है तो विश्व के अनेक देशों के समक्ष विनिर्मित उत्पादों और सस्ते श्रम का संकट उत्पन्न हो सकता है।


    भारत पर प्रभाव

    • भारत प्रत्यक्ष रूप से BRI परियोजना का भागीदार नहीं है। यदि इस परियोजना पर प्रतिबंध लगता है तो निश्चित ही यह भारत की सामरिक चिंताओं को कम कर सकता है क्योंकि इस परियोजना के एक भाग के रूप में CPEC पाकिस्तान के कब्ज़े वाले भारतीय क्षेत्र से होकर निकलता है।
    • चीन की अगुवाई में निर्मित इस परियोजना के प्रतिबंधित होने से भारत विश्व के समक्ष स्वयं को विनिर्माण के एक केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है।
    • चीन BRI परियोजना के माध्यम से भारत को घेरने का प्रयास कर रहा है, ऐसे में यदि इस परियोजना को प्रतिबंधित कर दिया जाता है तो भारत के प्रति उसकी ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल’ की नीति को गहरा धक्का पहुँचेगा।
    • चिंता इस बात की भी है कि यदि चीन के द्वारा ऋण प्राप्त भारत के पड़ोसी (श्रीलंका, पाकिस्तान बांग्लादेश, नेपाल) ऋण चुकाने में विफल रहे तो चीन इन देशों को अपना उपनिवेश बना सकता है, जो सीधे तौर पर भारत के सामरिक और रणनीतिक हितों को चुनौती देगा।


    आगे की राह

    • इस संकट की घड़ी में विश्व के सभी देशों को अपना पूरा प्रयास इस वैश्विक महामारी से निपटने की दिशा में करना चाहिये।
    • वैश्विक महाशक्तियों को अपने संसाधनों का इष्टतम प्रयोग करते हुए समस्त प्रयास इस महामारी की हर संभव रोकथाम की दिशा में करने चाहिये, इसके साथ ही भारत से सीख लेते हुए अपने पड़ोसी देशों व उन क्षेत्रीय संगठनों, जिनका वे हिस्सा हैं, की ओर सहायता का हाथ बढ़ाना चाहिये।
    • चीन को आगे बढ़कर इस वैश्विक महामारी पर किये गए अध्ययन को विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य देशों के साथ साझा करना चाहिये ताकि इस वायरस के प्रसार को रोकने में सामूहिक उपाय किये जा सकें।
    • विश्व के सभी देशों को विनिर्माण क्षेत्र व आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न केंद्रों के निर्माण की दिशा में भी कार्य करना होगा।

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