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    रेलवे का संगठनात्मक पुनर्गठन

    प्रधानमंत्री मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेलवे के संगठनात्मक पुनर्गठन को मंज़ूरी दे दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह निर्णय भारत की विकास यात्रा और आर्थिक विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ध्यातव्य है कि लगभग 166 वर्ष पुरानी भारतीय रेलवे की आर्थिक स्थिति विगत कुछ वर्षों से अच्छी नहीं दिखाई दे रही है, हाल ही में जारी CAG की रिपोर्ट में सामने आया था कि आर्थिक लाभ के मोर्चे पर भारतीय रेलवे का प्रदर्शन आशा के अनुरूप नहीं रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा लिये गए इस निर्णय की महत्ता से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि पुनर्गठन का यह निर्णय भारतीय रेलवे के विकास में किस प्रकार योगदान देता है।

    प्रस्तावित सुधार:

    • सेवाओं का एकीकरण: पुनर्गठन से संबंधित कई निर्णयों में सबसे महत्त्वपूर्ण निर्णय रेलवे सेवाओं के एकीकरण का है। इसके तहत रेलवे के ग्रुप ‘ए’ की मौजूदा आठ सेवाओं का विलय एक केंद्रीय सेवा ‘भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा’ में किया जाएगा।
    • रेलवे बोर्ड का पुनर्गठन: रेलवे की ग्रुप ‘ए’ सेवाओं के अतिरिक्त रेलवे बोर्ड का भी पुनर्गठन किया जाएगा, जिसमें कुल चार सदस्य और कुछ स्वतंत्र सदस्य शामिल होंगे तथा इसकी अध्यक्षता रेलवे बोर्ड के चेयरमैन करेंगे।
      • चेयरमैन रेलवे बोर्ड में ‘मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी’ के रूप में कार्य करेगा। इसके अतिरिक्त 4 अन्य सदस्‍य अवसंरचना, परिचालन एवं व्‍यावसायिक विकास, रोलिंग स्‍टॉक एवं वित्तीय विभाग से जुड़े कार्यों का प्रतिनिधित्व करेंगे।
      • स्वतंत्र सदस्यों को अस्थायी रूप से बोर्ड में शामिल करने का एकमात्र उद्देश्य उनके ज्ञान और अनुभव के माध्यम से रेलवे के विकास को सुनिश्चित करना है।


    रेलवे बोर्ड की मौजूदा कार्यप्रणाली

    • रेलवे बोर्ड भारतीय रेलवे का सर्वोच्च निकाय है जो रेलवे मंत्रालय के माध्यम से संसद को रिपोर्ट करता है। ज्ञात हो कि रेलवे बोर्ड का गठन वर्ष 1905 में रेल मंत्रालय की सहायता हेतु प्रमुख प्रशासन एवं कार्यकारी निकाय के रूप में किया गया था।
    • पुनर्गठन की योजना के अनुसार, अब रेलवे बोर्ड में अध्यक्ष के अतिरिक्त 4 अन्य सदस्य होंगे। ध्यातव्य है कि मौजूदा कार्यप्रणाली के अनुसार रेलवे बोर्ड में अध्यक्ष सहित कुल 8 सदस्य होते हैं जिसमें रोलिंग स्टॉक, ट्रैक्शन, यातायात, अभियांत्रिकी, कार्मिक, सामग्री प्रबंधन, सिग्लन और दूरसंचार सदस्य शामिल हैं।
    • ‘भारतीय रेलवे चिकित्‍सा सेवा’: रेलवे सेवाओं के एकीकरण और रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन के अतिरिक्त सरकार ने मौजूदा ‘भारतीय रेलवे चिकित्‍सा सेवा’ का नाम बदलकर ‘भारतीय रेलवे स्‍वास्‍थ्‍य सेवा‘ करने का भी निर्णय लिया है।


    क्यों आवश्यक है पुनर्गठन?

    • भारतीय रेलवे ने अगले 12 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपए के प्रस्‍तावित निवेश से आधुनिकीकरण के साथ-साथ यात्रियों को बेहतर सेवाएँ मुहैया कराने के उद्देश्य से एक महत्‍वाकांक्षी कार्यक्रम तैयार किया है।
    • विशेषज्ञों का मानना है कि इस उद्देश्य हेतु के लिये भारतीय रेलवे को एक मज़बूत और एकीकृत संगठन की आवश्‍यकता होगी, ताकि वह इस ज़िम्‍मेदारी को पूरी एकाग्रता के साथ निभा सके साथ ही, विभिन्‍न चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो सके।
    • ध्यातव्य है कि विश्‍व भर की रेल प्रणालियों, जिनका निगमीकरण हो चुका है, के विपरीत भारतीय रेलवे का प्रबंधन अभी भी सीधे तौर पर सरकार द्वारा किया जाता है। इसे विभिन्‍न विभागों जैसे- यातायात, सिविल, यांत्रिक, विद्युतीय, सिग्‍नल एवं दूरसंचार, स्‍टोर, कार्मिक, लेखा इत्‍यादि में संगठित किया गया है।


    पुनर्गठन का प्रभाव

    Organizational reorganization of railways

    • रेलवे पुनर्गठन के उद्देश्य से घोषित उक्त सुधारों से भारतीय रेलवे जैसे विशालकाय संगठन में ‘विभागीयकरण‘ को समाप्त करने में काफी मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि रेलवे में वर्तमान में लगभग 1.3 मिलियन से अधिक लोग कार्यरत हैं जो कि सशस्त्र बलों के बाद देश में दूसरा सबसे बड़ा रोज़गार प्रदाता है। कई बार यह देखा जाता है कि विभागीय खींचतान के कारण कुछ महत्त्वपूर्ण परियोजनाएँ बीच में ही रुक जाती हैं और इस विलंब के कारण रेलवे को राजस्व का काफी नुकसान होता है।
    • रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन और रेलवे सेवाओं के एकीकरण से रेलवे प्रबंधन में महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेज़ी आएगी और रेलवे में सुव्यवस्थित काम-काज को भी बढ़ावा मिलेगा।
    • इससे राज्य प्राधिकरणों के साथ समन्वय बेहतर होगा। साथ ही रेलवे बोर्ड नीति निर्माण, रणनीतिक योजना निर्माण और जोनल रेलवे के साथ समन्वय पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा।


    ट्रेन-18 के लॉन्च में देरी
    इसी वर्ष जनवरी माह में रेलवे के दो विभागों के मध्य मतभेद के कारण ट्रेन-18 की लॉन्चिंग में काफी विलंब हो गया था। ट्रेन-18 को लेकर इलेक्ट्रिकल विभाग का कहना था कि लॉन्चिंग से पूर्व ट्रेन को इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर जनरल (EIG) से सेफ्टी सर्टिफिकेट प्राप्त करना चाहिये, जबकि मैकेनिकल विभाग का कहना था कि कानून के मुताबिक EIG से सेफ्टी सर्टिफिकेट लेने की ज़रूरत नहीं है।

    रेलवे पुनर्गठन संबंधी विभिन्न समितियाँ


    प्रकाश टंडन समिति (1994)
    प्रकाश टंडन समिति वह पहली समिति थी, जिसने रेलवे के प्रदर्शन का सूक्ष्म विश्लेषण किया और इस संदर्भ में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की। समिति की सिफारिशों में आधुनिक वित्तीय सूचना प्रणाली, ग्राहक केंद्रित व्यापारिक दृष्टिकोण, निवेश प्रणाली में सुधार, मानव संसाधन विकास और संगठनात्मक पुनर्गठन जैसे मुद्दों को कवर किया गया था।
    सैम पित्रोदा समिति (2012)
    रेल मंत्रालय द्वारा भारतीय रेल के आधुनिकीकरण पर सैम पित्रोदा की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में ट्रैक और पुल, सिग्नलिंग, रोलिंग स्टॉक, ट्रेनों कि गति, स्वदेशी विकास, सुरक्षा, वित्त पोषण और मानव संसाधन जैसे 15 मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की अनुशंसा की थी।
    बिबेक देबरॉय समिति (2015)
    रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन और भारतीय रेलवे कि विभिन्न परियोजनाओं के लिये संसाधन जुटाने हेतु एक खाका तैयार करने के उद्देश्य से बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। बिबेक देबरॉय समिति की प्रमुख सिफारिशों में तत्कालीन ग्रुप ‘ए’ की सभी सेवाओं को दो भागों- 1) तकनीकी (2) गैर-तकनीकी में विभाजित करना भी शामिल था।


    भारतीय रेलवे की भूमिका

    • भारतीय रेलवे को भारत के मध्यम एवं निम्न वर्ग की यात्रा स्मृतियों में एक महत्त्वपूर्ण स्थान हासिल है। भारतीय रेल को भारत में प्रचलित यात्रा साधनों के बीच परिवहन का सबसे किफायती साधन माना जाता है।
    • एक छोटे से संगठन के रूप में शुरू हुआ भारतीय रेलवे आज भारत के आर्थिक-सामाजिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और लगभग 1.3 मिलियन कर्मचारियों के साथ यह दुनिया का सातवाँ सबसे बड़ा नियोक्ता है।
    • सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और सेवा क्षेत्र का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा होने के नाते रेलवे भी देश के आर्थिक विकास में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से योगदान दे रहा है।
    • भारतीय रेलवे न केवल प्रत्यक्ष रूप से बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से भी देश में रोज़गार के सृजन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


    निष्कर्ष


    कई जानकार सरकार के निर्णय को देश के विकास में रेलवे की भूमिका सुनिश्चित करने हेतु एक शुरुआती कदम के रूप में देख रहे हैं। आवश्यक है कि इस प्रक्रिया को जल्द-से-जल्द पूरा किया जाए, इस उद्देश्य के लिये विशेषज्ञों की एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जा सकता है जो कि निर्णय से संबंधित विभिन्न हितधारकों से बातचीत कर एक संतुलित विकल्प की खोज करेगी।

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