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    Prelims Facts|प्रीलिम्स फैक्ट्स: 13 फरवरी, 2020

    प्रीलिम्स फैक्ट्स: 13 फरवरी, 2020

    मन कृष्णा

    Mana Krishna

    आंध्रप्रदेश सरकार ने ‘क्लीन कृष्णा-गोदावरी कैनाल्स मिशन’ और ‘प्लास्टिक विरोधी अभियान’ के तहत कृष्णा नदी से निकाली गई नहरों की सफाई हेतु मन कृष्णा (Mana Krishna) अभियान लॉन्च किया।

    मुख्य बिंदु:

    • इस अभियान की शुरुआत आंध्रप्रदेश के रामावारप्पडू (Ramavarappadu) पंचायत से की गई।
    • उद्देश्य: इसका उद्देश्य स्वच्छता को लेकर स्थानीय लोगों के बीच जागरूकता फैलाना और नहरों की सफाई करना है।
    • लक्ष्य: आंध्रप्रदेश सरकार ने कृष्णा-गोदावरी डेल्टा क्षेत्र में कृष्णा, गुंटूर, पश्चिम गोदावरी तथा प्रकाशम ज़िलों की लगभग 7,000 किलोमीटर लंबाई की नदी एवं नहरों को प्रदूषण से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है।
    • क्लीन कृष्णा-गोदावरी कैनाल्स मिशन (Clean Krishna-Godavari Canals Mission) के अध्यक्ष मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी हैं। यह नहरों एवं नदियों को साफ रखने का एक सतत् मिशन है।

    मुक्तोश्री

    Muktoshri

    पश्चिम बंगाल सरकार ने शोधकर्त्ताओं द्वारा खोजी गई चावल की नई किस्म मुक्तोश्री (Muktoshri) के व्यवसायीकरण की अनुमति दी गई, जो आर्सेनिक प्रतिरोधी (Arsenic-Resistant) है।

    मुख्य बिंदु:

    • मुक्तोश्री को आईईटी 21845 (IET 21845) नाम से भी जाना जाता है। इसे पश्चिम बंगाल के कृषि विभाग के अंतर्गत आने वाले राइस रिसर्च स्टेशन, चिनसुराह और राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
    • चावल की इस नई किस्म को वर्ष 2013 में विकसित किया गया था जबकि पश्चिम बंगाल सरकार ने वर्ष 2019 में मुक्तोश्री के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी थी।

    महत्त्व:

    • पश्चिम बंगाल भूजल में आर्सेनिक की उच्चतम सांद्रता वाले राज्यों में से एक है जिसके सात ज़िलों के 83 ब्लॉकों में आर्सेनिक का स्तर सामान्य सीमा से अधिक है।
    • कई अध्ययनों से पता चला है कि भूजल और मिट्टी के द्वारा आर्सेनिक धान के माध्यम से खाद्य शृंखला में प्रवेश कर सकता है।
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लंबे समय तक आर्सेनिक-युक्त जल के पीने एवं खाना पकाने में उपयोग करने से विषाक्तता हो सकती है। आर्सेनिक के कारण त्वचा क्षतिग्रस्त एवं त्वचा कैंसर जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं।

    यारावायरस

    Yaravirus

    शोधकर्त्ताओं ने ब्राज़ील की एक झील में एक वायरस की खोज की है, जिसे उन्होंने यारावायरस (Yaravirus) नाम दिया है।

    Yaravirus

    मुख्य बिंदु: 

    • इस वायरस का नामकरण एक पज़लिंग ओरिजिन एंड फिलोजेनी (Puzzling Origin And Phylogeny) के साथ अमीबा वायरस का एक नई वंशावली के रुप में किया गया है।
    • इसे यारावायरस नाम ब्राज़ील की देशज जनजाति टूपी-गुआरानी (Tupi-Guarani) की पौराणिक कहानियों में ‘मदर आफ वाटर्स’ (Mother Of Waters) जिसे  ‘यारा’ (Yara) कहा जाता है, की याद में दिया गया है।
    • यारावायरस के छोटे आकार के कारण यह अन्य वायरस से अलग है। यह अमीबा (Amoeba) को संक्रमित करता है और इसमें ऐसे जीन होते हैं जिनका उल्लेख पहले नहीं किया गया है।
    • यारावायरस के जीनोम का 90% से अधिक हिस्से को पहले नहीं देखा गया, शोधकर्त्ताओं ने आनुवंशिक विश्लेषण के लिये मानक प्रोटोकॉल का उपयोग करने तथा किसी भी ‘क्लासिकल वायरल जीन्स’ को खोजने में असमर्थ होने के बाद इसके बारे में बताया।
    • शोधकर्त्ताओं का कहना है कि अमीबा को प्रभावित करने वाले अन्य विषाणुओं में कुछ समानताएँ हैं जो यारावायरस में नहीं हैं। यह वायरस मानव कोशिकाओं को संक्रमित नहीं करता है।

    बिम्सटेक आपदा प्रबंधन अभ्यास

    BIMSTEC Disaster Management Exercise

    राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (National Disaster Response Force- NDRF) बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक को-ऑपरेशन आपदा प्रबंधन अभ्यास (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation Disaster Management Exercise) के दूसरे संस्करण की मेजबानी ओडिशा में करेगा।

    मुख्य बिंदु: 

    • थीम: इस अभ्यास की थीम ‘एक सांस्कृतिक विरासत स्थल जो भूकंप और बाढ़ या तूफान से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है’ (A cultural heritage site that suffers severe damage in the earthquake and flooding or storm) है।
    • उद्देश्य: इस अभ्यास का उद्देश्य मुख्य प्राकृतिक आपदा के दौरान अधिसूचना, तैयारी एवं त्वरित प्रतिक्रियाओं के लिये मौजूदा आपातकालीन प्रक्रियाओं का परीक्षण करना है।
    • इस अभ्यास में  बिम्सटेक के सदस्य देशों में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्याँमार और नेपाल भाग ले रहे हैं जबकि अन्य दो सदस्य देश भूटान तथा थाईलैंड अभ्यास में भाग नहीं ले रहे हैं।

    जल जीवन मिशन

    Jal Jeevan Mission

    राजस्थान सरकार ने जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission- JJM) के लिये केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक मदद के मानदंडों में बदलाव की मांग की है।

    जल जीवन मिशन:

    • जल जीवन मिशन के अंतर्गत वर्ष 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति व्यक्ति प्रति दिन 55 लीटर पानी की आपूर्ति की योजना है ताकि राज्यों पर वित्तीय बोझ कम हो सके।
    • वर्तमान में जल जीवन मिशन के अंतर्गत केंद्र और राज्य के बीच योजना लागत की हिस्सेदारी को 50:50 के अनुपात में निर्धारित किया गया है।
    • जल जीवन मिशन को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय (Union Ministry for Jal Shakti) के अंतर्गत क्रियान्वित किया जा रहा है।
    • जल जीवन मिशन विभिन्न प्रकार के जल संरक्षण जैसे- जल संभरण, लघु सिंचाई टैंकों की गाद निकलना, कृषि के लिये ग्रे-वाटर का उपयोग और जल स्रोतों के सतत् विकास) के प्रयासों पर आधारित है।

    राजस्थान में जल जीवन मिशन का क्रियांवयन:

    • वर्तमान में राजस्थान में केवल 12% घरों में पाइप से जलापूर्ति हो रही है। अतः राजस्थान सरकार ने लगभग 98 लाख घरों को जलापूर्ति प्रदान करने के लिये जल के स्रोतों का कायाकल्प करके जल जीवन मिशन को लागू करने के लिये नई कार्य योजना तैयार की है।
    • राजस्थान में जल जीवन मिशन को ‘राज्य जल और स्वच्छता मिशन’ (State Water and Sanitation Mission) के तहत लागू किया जा रहा है।
    • राज्य जल और स्वच्छता मिशन पहले से ही लागू है और इसके लिये विभिन्न जल स्रोतों का दोहन करने के साथ वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
    • राजस्थान में केवल 1.01% सतही जल मौजूद है और यहाँ भौगोलिक रूप से दुर्गम क्षेत्रों में पीने के पानी की आपूर्ति करना कठिन है जिसके कारण जल जीवन मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये केंद्र से अधिक सहायता की उम्मीद की थी।

    वैनगंगा नदी

    Wainganga River

    महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Anti Corruption Bureau- ACB) ने वैनगंगा नदी (Wainganga River) पर गोसेखुर्ध सिंचाई परियोजना (Gosekhurdh Irrigation Project) हेतु निविदाओं में अनियमितता के लिये विदर्भ सिंचाई विकास निगम (Vidarbha Irrigation Development Corporation- VIDC) के 12 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

    Seoni

    वैनगंगा नदी के बारे में 

    • वैनगंगा नदी (Wainganga River) का उद्गम मध्य प्रदेश के सिवनी (Seoni) ज़िले में स्थित महादेव पहाड़ियों से होता है।
    • यह गोदावरी की एक प्रमुख सहायक नदी है। महादेव पहाड़ियों से निकलने के बाद यह नदी दक्षिण की ओर बहती है और वर्धा नदी (Wardha River) से मिलने के बाद इन दोनों नदियों की संयुक्त धारा प्राणहिता नदी (Pranahita River) कहलाती है और आगे चलकर यह नदी तेलंगाना के कालेश्वरम में गोदावरी नदी से मिल जाती है।

    गोदावरी नदी

    • इसका उद्गम महाराष्ट्र में नासिक के पास त्रयंबकेश्वर है।
    • अपवाह बेसिन: इस नदी बेसिन का विस्तार महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा राज्यों के अलावा मध्य प्रदेश, कर्नाटक और पुद्दुचेरी के कुछ क्षेत्रों में है। इसकी कुल लंबाई लगभग 1465 किमी. है।
    • सहायक नदियाँ: प्रवरा, पूर्णा, मंजरा, वर्धा, प्राणहिता, इंद्रावती, मनेर और सबरी।
    • इस नदी बेसिन का विस्तार मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र  में है। इसकी कुल लंबाई लगभग 569 किमी

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