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    WTO और विवाद निपटान का संकट

    विश्व व्यापार संगठन (WTO) की अपीलीय प्राधिकरण के तीन में से दो सदस्य इसी माह (दिसंबर) में कार्यमुक्त हो गए हैं, ज्ञात हो कि अब प्राधिकरण में मात्र एक ही सदस्य बचा है। इसके अतिरिक्त WTO के अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष एक अन्य समस्या यह है कि पिछले वर्ष अमेरिका ने इसमें नई नियुक्तियों पर वीटो का प्रयोग करते हुए रोक लगा दी थी, क्योंकि अमेरिका को लगता है कि विश्व व्यापार संगठन पक्षपात की भावना से कार्य करता है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि विश्व व्यापार संगठन का अपीलीय प्राधिकरण ढहने के कगार पर है और यदि वैश्विक समुदाय द्वारा अतिशीघ्र इसकी स्थिति पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो इसकी प्रासंगिकता पर प्रश्नचिह्न लगता दिखाई दे सकता है।

    पृष्ठभूमि WTO

    WTO

    • WTO के नियमों के अनुसार, विवाद निपटान तंत्र या अपीलीय प्राधिकरण को कार्य करने के लिये कम-से-कम तीन सदस्यों की आवश्यकता होती है और बीते दिनों 2 सदस्यों की कार्यमुक्ति से अपीलीय प्राधिकरण का संचालन पूरी तरह से रुक गया है।
    • कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष मौजूद इस चुनौती से स्वयं WTO के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि विवादों को निपटाने की व्यवस्था संगठन का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य माना जाता है।
    • दरअसल बीते वर्ष अमेरिका ने वीटो का प्रयोग करते हुए प्राधिकरण में नए सदस्यों की नियुक्ति और 4 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके सदस्यों की पुनर्नियुक्ति पर रोक लगा दी थी।
    • अमेरिका ने स्वयं के साथ हुए ‘अनुचित’ व्यवहार का हवाले देते हुए विश्व व्यापार संगठन पर शक्तियों का दुरुपयोग करने और पक्षपात की भावना से कार्य करने का आरोप लगाया था।
      • अमेरिका के इस निर्णय के समर्थकों का मानना है कि WTO ने चीन को उसकी अर्थव्यवस्था मज़बूत करने का अवसर दिया है। साथ ही वह चीन द्वारा व्यापक रूप से प्रयोग की जा रहीं अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिये भी कुछ नहीं कर रहा।


    WTO का विवाद निपटान तंत्र

    • WTO की विवाद निपटान प्रणाली में किसी भी व्यापार विवाद को आरंभ में संबंधित सदस्य देशों के बीच परामर्श के माध्यम से निपटाने की कोशिश की जाती है।
    • यदि यह उपाय सफल नहीं होता है तो मामला एक विवाद पैनल (Dispute Panel) के पास जाता है। विवाद पैनल का निर्णय अंतिम होता है, लेकिन उसके निर्णय के खिलाफ अपील अपीलीय प्राधिकरण (Appellate Body-AB) के समक्ष की जा सकती है।
      • ज्ञात हो कि WTO का विवाद निस्तारण तंत्र दुनिया में सबसे सक्रिय तंत्रों में से एक है।
    • अपीलीय प्राधिकरण द्वारा विवाद पैनल के निर्णयों की समीक्षा की जाती है और अपीलीय प्राधिकरण द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत किये जाने के पश्चात् यह अंतिम होती है तथा सदस्य देशों पर बाध्यकारी होती है।
    • WTO प्रणाली के अनुसार, AB में सात सदस्य होने चाहिये जो WTO के सदस्य देशों के बीच आम सहमति से नियुक्त किये जाते हैं। WTO के विवाद पैनल से किसी भी अपील को AB के सात सदस्यों में से तीन द्वारा सुना जाता है।
    • इन सात सदस्यों को चार वर्ष के कार्यकाल के लिये नियुक्त किया जाता है। एक बार जब किसी AB सदस्य का कार्यकाल पूरा हो जाता है तो AB की सदस्य क्षमता को सात बनाए रखने के लिये एक नए सदस्य की नियुक्ति की आवश्यकता होती है।


    क्यों महत्त्वपूर्ण है अपीलीय प्राधिकरण?

    WTO

    • विदित है कि अपीलीय प्राधिकरण की स्थापना वर्ष 1995 में की गई थी और तब से अब तक विश्व व्यापार संगठन (WTO) के संज्ञान में तकरीबन 500 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय विवाद लाए जा चुके हैं एवं लगभग 350 से अधिक मामलों में निर्णय भी दिया है।
    • संगठन का विवाद निपटान तंत्र दुनिया में सबसे अधिक सक्रिय तंत्रों में से एक है और अपीलीय प्राधिकरण इन मामलों में सर्वोच्च प्राधिकारी है।
    • विश्व व्यापार संगठन की विवाद निपटान प्रक्रिया को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रवाह में सुगम सुनिश्चित करने के लिये महत्त्वपूर्ण माना जाता है।


    प्राधिकरण की निष्क्रियता का प्रभाव

    • यदि विश्व व्यापार संगठन के अपीलीय प्राधिकरण को निष्क्रिय घोषित कर दिया जाता है तो WTO के समक्ष अपने अंतर्राष्ट्रीय विवादों को ले जाने वाले देशों को पैनल द्वारा लिये गए निर्णय को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा, चाहे उसमें किसी प्रकार भी प्रकार की त्रुटी क्यों न हो।
    • वैश्विक व्यापार में संरक्षणवाद को कम करने के लिये बीते कुछ वर्षों से चले आ रहे प्रयासों के मद्देनज़र प्राधिकरण की निष्क्रियता WTO के ढाँचे को कमजोर कर सकती है।
    • वर्तमान में व्यापार तनाव एक प्रमुख चिंता है। उदाहरण के लिये अमेरिका-चीन एवं अमेरिका-भारत के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है।
    • यदि यह प्राधिकरण समाप्त हो जाता है तो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विवादों में उलझे देशों को निस्तारण के लिये कोई मंच नहीं रह जाएगा।


    भारत पर प्रभाव

    • WTO के अपीलीय प्राधिकरण की निष्क्रियता बिलकुल भी भारत के हित में नहीं है, क्योंकि इसके कारण भारत के कई विवाद अधर में रह जाएँगे।
    • ज्ञात हो कि वर्ष 1995 से अब तक भारत कुल 54 विवादों में प्रत्यक्ष भागीदार रहा है, जबकि 158 विवादों में तीसरे पक्ष के रूप में शामिल रहा है।
    • इसी वर्ष फरवरी में अपीलीय प्राधिकरण ने भारत और जापान के मध्य चल रहे एक विवाद में अपील के लिये कर्मचारी उपलब्ध कराने की असमर्थता व्यक्त की थी।
      • ध्यातव्य है कि यह विवाद भारत द्वारा लोहे और इस्पात उत्पादों के आयात पर लगाए गए कुछ सुरक्षा उपायों से संबंधित है।
    • विगत एक वर्ष में विश्व व्यापार संगठन में भारत के खिलाफ चार शिकायतें दर्ज़ कराई गई हैं जिनमें यह आरोप लगाया गया है कि भारत अपने चीनी और गन्ना उत्पादकों के लिये WTO के नियमों के दायरे से बाहर जाकर समर्थन जुटाने के उपाय कर रहा है।


    विश्व व्यापार संगठन (WTO)और उसकी प्रासंगिकता

    • विश्व व्यापार संगठन विश्व में व्यापार संबंधी अवरोधों को दूर कर वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1995 में मराकेश संधि के तहत की गई थी।
    • वर्ष 1995 में WTO के अस्तित्व में आने के बाद से विश्व में व्यापक परिवर्तन आया है जिनमें से कई परिवर्तन गहन संरचनात्मक प्रकृति के रहे हैं। नई प्रौद्योगिकियों ने हमारे सोचने, संवाद और व्यापार करने के तरीकों को बदल दिया है।
    • वर्ष 1995 में विश्व की 0.8 प्रतिशत से भी कम आबादी इंटरनेट का उपयोग कर रही थी, जबकि जून 2019 में यह संख्या लगभग 57 प्रतिशत है।
    • संचार प्रौद्योगिकियों और कंटेनराइज़ेशन (वस्तु परिवहन का सुगम साधन) ने लागत को कम कर दिया है तथा देश से आयात-निर्यात होने वाले घटकों की मात्रा में वृद्धि की है जिससे उत्पादन शृंखला के अंतर्राष्ट्रीयकरण में वृद्धि हुई है।
      • उदाहरण के लिये आईफोन (iPhone) में लगभग 14 मुख्य घटक होते हैं जिनका निर्माण 7-8 बहुराष्ट्रीय कंपनियों (40 से अधिक देशों में उनकी शाखाओं में) द्वारा किया जाता है।
    • वर्ष 1995 से अब तक वस्तुओं का समग्र व्यापार लगभग चार हो गया है, जबकि WTO के सदस्य देशों के आयात शुल्क में औसतन 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। विश्व व्यापार का आधा से अधिक हिस्सा अब शुल्क-मुक्त है (WTO, 2015)।
    • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि दर विश्व जीडीपी में वृद्धि दर से अधिक हो गई है तथा व्यापार में यह वृद्धि लोगों के जीवन स्तर में सुधार के साथ जुड़ी रही है।
    • वर्तमान में WTO अपने सदस्य देशों के बीच वैश्विक व्यापार प्रवाह के 98 प्रतिशत से अधिक भाग को नियंत्रित करता है। इसके अतिरिक्त WTO मुक्त व्यापार समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी करता है, वैश्विक व्यापार तथा आर्थिक नीतियों पर अनुसंधान करता है, साथ ही विभिन्न देशों के मध्य व्यापार को लेकर होने वाले विवादों के लिये विवाद निवारण तंत्र का कार्य भी करता है।
    • इस बात पर गौर करने की बजाय कि WTO ने कितनी मात्रा में व्यापार का सृजन किया है तथा शुल्क में कितनी कमी की है, एक अन्य दृष्टिकोण पर ध्यान दिया जाना चाहिये कि WTO के कारण प्रत्येक वर्ष 340 बिलियन डॉलर मूल्य के व्यापार के नुकसान में कमी आई है।


    आगे की राह

    • जब अपीलीय प्राधिकरण में नए सदस्यों की नियुक्ति का निर्णय लिया जाता है तो इसमें WTO के सभी सदस्यों की आम सहमति ज़रूरी होती है। अगर इनमें सहमति नहीं बन पाती है तो मतदान का प्रावधान है। ऐसे में अमेरिका के हठ को देखते हुए इस प्राधिकरण के पुनः कार्यान्वयित न होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
    • इस स्थिति को देखते हुए विवादों के निपटान हेतु कई राज्यों ने तदर्थ समाधान को अपनाने का प्रयास किया है।
      • इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे राष्ट्रों ने अग्रिम रूप से उन दोनों के बीच विवाद में पैनल के फैसले को अपील नहीं करने के लिये सहमति व्यक्त की है।
      • इसके अलावा यूरोपीय संघ (EU), नॉर्वे और कनाडा ने भी मध्यस्थता के माध्यम से डिस्प्यूट सेटलमेंट अंडरस्टैंडिंग (DSU) के अनुच्छेद 25 का उपयोग करते हुए किसी भी विवाद को हल करने हेतु एक अंतरिम अपील प्रणाली पर सहमति व्यक्त की है।
    • भारत सहित 17 अल्प-विकसित और विकासशील देशों के समूह ने अपीलीय प्राधिकरण में गतिरोध समाप्त करने हेतु एक साथ कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई है। अतः इस आशय का एक प्रस्ताव लाया जाए एवं मतदान हो तथा बहुमत के आधार पर अपीलीय प्राधिकरण में नए सदस्य की नियुक्ति करने का प्रयास किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि कुछ जानकार इस इसे अंतिम विकल्प के रूप में भी देख रहे हैं।

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